इश्क बड़े-बडे़ को निकम्मा कर देता है। इसलिए उर्दू के मशहूर शायर ने लिखा
है इश्क ने गालिब निकम्मा कर दिया वरना हम भी आदमी थे काम के। ऐसा ही एक
वाकया सामने आया है, जिसमें एक लखपति युवक एक विदेशी युवती को पहली ही नजर
में दिल दे बैठा और तीन महीनों में ही लखपति से कंगाल हो गया। आज
आलम यह है कि कभी दिल्ली के पॉश इलाके में मेहंदी पार्लर चलाने वाला आज
अमृतसर की सड़कों पर महिलाओं के हाथों में मेहंदी लगा रहा है। वह भी केवल
शाम के पांच बजे तक। उसके बाद उसकी हालत पागलों जैसी हो जाती है और वह
दर्द भरे गीतों को ऊंची आवाज में गाकर अपनी विदेशी प्रेमिका की याद में खो
जाता है। वह रोजाना अपनी रात पीपल के पेड़ के नीचे गुजारता है। उसे पीपल
के पेड़ पर अपनी महबूबा नजर आती है। बृहस्पतिवार की रात लारेंस
रोड पर स्थित बीबीके डीएवी कालेज के बाहर पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा युवक
दर्द भरे गीत-झलक दिखला जा एक बार आजा आ जा भी जा, अफसाना लिख रहा हूं
दिले बेकरार का, तुम्हें भूल जाने का हक है अगर आदि कई दर्द भरे गीत गा
रहा था। उसके गीतों का दर्द लोगों को उसकी तरफ देखने को मजबूर कर रहा था।
वहीं जब उससे बातचीत की तो उसने अपना नाम राज कुमार उर्फ राजू चौहान पुत्र
राम दयाल चौहान निवासी गांव कटरा सराय पोस्ट आफिस गोरी गंज जिला
सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) बताया। उसने बताया कि वह हाथों पर मेहंदी लगाने
का काम करता है। उसके जैसे उत्तर भारत में कोई कारीगर नहीं है। वह दिल्ली
के ग्रेटर कैलाश पार्ट वन में राजू मेहंदी पार्लर चलाता था। उसके पार्लर
में दस लोग काम करते थे। वह विवाह शादियों में आर्डर पर दिल्ली के
अतिरिक्त कानपुर, चंडीगढ़, लुधियाना और अन्य महानगरों में बड़ी शख्सियतों
की बेटियों को उनकी शादी पर मेहंदी लगाने जाता था। उल्लेखनीय है
कि तीन महीने पहले उसके पार्लर में इंग्लैंड निवासी नीया नामक युवती
मेहंदी लगवाने आई। तीस वर्षीय राजू ने बताया कि वह अब तक सैकड़ों युवतियों
को मेहंदी लगा चुका है। मगर नीया को देख कर उसके दिल की घंटी बजी और वह
उसे दिल दे बैठा। नीया भी उसकी कारीगरी देख कर खुश हुई। नीया ने उसे सबके
सामने पार्लर में ही चूम लिया और साथ ही अपना इंग्लैंड का पता भी दे दिया।
वह लंदन में गुरुद्वारा सिंह सभा के पास मिडिलसेक्स रहती है। राजू जो हर
वर्ष लाखों रुपये इनकम टैक्स भरता था। उसने नीया को दिल देने के बाद काम
करना बंद कर दिया। धीरे-धीरे उसका पार्लर बंद हो गया। दिल्ली के ट्रेवल
एजेंट राजेश गुप्ता को उसने पांच लाख रुपये और पासपोर्ट दिया। मगर वह उसका
पासपोर्ट और रुपये लेकर फरार हो गया। नीया के प्यार में पागल राजू को उसके
परिजनों ने भी घर से निकाल दिया। इस बीच तीन दिन पहले ही वह अमृतसर
पहुंचा। वह केवल रोटी खाने के लिए काम करता है। उसके बाद अपनी महबूबा की
यादों में खो जाता है। राजू ने बताया कि पांच बजे के बाद उसका हाल पागलों
जैसा हो जाता है। वह किसी को पहचानता नहीं है। बस दर्द भरे गीत गाता है।
पीपल के पेड़ के नीचे ही बैठता है। उसे पीपल के पेड़ पर अपनी महबूबा नजर
आती है। अगर वह पीपल के पेड़ के नीचे न बैठे तो उसे ऐसा लगता है जैसे
उसमें कोई प्रेत आत्मा आ गई हो। राजू ने बताया कि कभी वह लखपति था और आज
कंगाल है। मगर वह फिर से मोहब्बत करके रुपया कमाएगा और अपनी महबूबा को
पाने के लिए इंग्लैंड जाएगा। राजू की प्रेम दीवानगी इस समय शहर में चर्चा
का विषय बनी हुई है।
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