देखा है जिंदगी को कुछ इतने करीब से चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से रास्ते तबाही के खुद ही निकाले हमने कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने हम नहीं जानते क्या है मोहब्बत अपना घर फूंक कर देखे हैं उजाले हमने
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